Saturday, October 3, 2026

मैं कैसे बन जाऊँ राम

 मैं कैसे बन जाऊँ राम

कोई मुझको बस ये समझा दे, मैं कैसे बन जाऊँ राम 


सूर्पनखा की नाक मैं काटूँ  या बाली के हर लूँ प्राण 

रावण  के मैं दस सर काटूँ या मारुं नाभि में बाण 

स्वर्ण मृग का मोह न त्यागु राजपाट के पीछे भागूं 

अपने ही बच्चों का वर्षो तक न लूँ मैं कोई भी भान 


कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 


सीता को अग्नि में डालूं या फिर उसका मै त्याग करूँ 

सबरी का जूठा भी खाऊं और शम्बूक का संहार करूँ 

जाति कूल और वर्ण वयवस्था का मन में विद्वेष भरूँ 

वाल्मीकि की कथा पढूं या गाउँ, तुलसी रचित वो गान 


कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 


दुनिया मुझको राम की भक्ति कुछ आकर ऐसे समझाए

मै अबोध सा सुनता जाऊं बस एक सवाल मन में दोहराये


राम विष्णु है राम ही कृष्णा, राम मिथ्या है राम ही तृष्णा

राम क्रोध है राम क्षमा है, राम ममता है राम ही माँ है 

राम दर्द है राम ही सुख, राम है तृप्ति राम ही भूख 

राम अल्ला है राम ही ईश्वर, राम अमर है राम ही नश्वर 

राम आदि है  राम अनंत, राम है साधु राम ही संत

राम नीर है राम है अग्नि, राम माया है राम ही ठगनी 

राम मंदिर है राम ही पूजा, राम के जैसा और न दूजा 


पर मेरी आँखों के आगे राम के नाम पर लूटती जान 

कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 




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