Sunday, October 4, 2026

पेड़ की ख्वाहिश

पेड़ तेरी क्या ख्वाहिश होगी पत्ते के गिरने के बाद
याद कर उन्हें रोता होगा आंसू खूब बहाता होगा 
वो भी तो तड़पी ही होगी मिट्टी में मिलने के बाद

क्या बनेगा सुखी ठूठ या फिर से आस लगाए होगा 
चिडयों के कोलाहल के संग सूरज का हमसाय होगा 
क्या तेरी शाखों पर फिर से कोई पपीहा बोलेगा 
या किसी आरे की नीचे तू अपनी किस्मत तोलेगा 


जड़ें भी तेरी गहरी होंगीं मिट्टी को वह जकड़ी होगी 
कितने झंझाबातों से वह अंदर-अंदर बिखरी होंगीं
नई मिट्टी की चाहत में वो मौजों से भी लड़ती होंगीं
सरफिरे किसी हाथों मे कुल्हाड़ी देख भी डरती होंगीं
पर तुझको ना छोड़ा होगा तूफ़ाँ के बहने के बाद

तू तो खूब लरजता था अपनी मोटी शाखों पर 
फिर भी पत्ती छोड़ चलीं पतझड़ के आने के बाद
फिर से उसकी चाह लगाए तू मेघों को पास बुलाए 
नए कोपल की चाहत में बारिश के गिरने के बाद

पेड़ तेरी क्या ख्वाहिश होगी पत्ते के गिरने के बाद

Saturday, October 3, 2026

मैं कैसे बन जाऊँ राम

 मैं कैसे बन जाऊँ राम

कोई मुझको बस ये समझा दे, मैं कैसे बन जाऊँ राम 


सूर्पनखा की नाक मैं काटूँ  या बाली के हर लूँ प्राण 

रावण  के मैं दस सर काटूँ या मारुं नाभि में बाण 

स्वर्ण मृग का मोह न त्यागु राजपाट के पीछे भागूं 

अपने ही बच्चों का वर्षो तक न लूँ मैं कोई भी भान 


कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 


सीता को अग्नि में डालूं या फिर उसका मै त्याग करूँ 

सबरी का जूठा भी खाऊं और शम्बूक का संहार करूँ 

जाति कूल और वर्ण वयवस्था का मन में विद्वेष भरूँ 

वाल्मीकि की कथा पढूं या गाउँ, तुलसी रचित वो गान 


कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 


दुनिया मुझको राम की भक्ति कुछ आकर ऐसे समझाए

मै अबोध सा सुनता जाऊं बस एक सवाल मन में दोहराये


राम विष्णु है राम ही कृष्णा, राम मिथ्या है राम ही तृष्णा

राम क्रोध है राम क्षमा है, राम ममता है राम ही माँ है 

राम दर्द है राम ही सुख, राम है तृप्ति राम ही भूख 

राम अल्ला है राम ही ईश्वर, राम अमर है राम ही नश्वर 

राम आदि है  राम अनंत, राम है साधु राम ही संत

राम नीर है राम है अग्नि, राम माया है राम ही ठगनी 

राम मंदिर है राम ही पूजा, राम के जैसा और न दूजा 


पर मेरी आँखों के आगे राम के नाम पर लूटती जान 

कोई मुझको बस ये समझा दे मैं कैसे बन जाऊँ राम 




आधे अधूरे

आधे अधूरे  

कुछ बातें आधी ही अच्छी 

उनको आधा ही रहने दो 

तुम आधी अपनी कह लेना 

मुझको अपना आधा कहने दो | 


वो आधी नींद के आधे सपने 

आधी रात की आधी बातें 

सबकुछ आधा ही बेहतर है 

तेरी खुशियों के आधे दिन 

मेरे गम की आधी रातें | 


कितना सुन्दर लगता है वो 

आसमान  का आधा चाँद 

राही का वो आधा गाँव 

और तेरी आधी भरी हुई मॉँग | 

 

पुरा गर मिल जाये जिस दिन 

मै सुना बेरंग हो जाऊंगा 

आधा पाकर आधा पाने को 

लौट लौट फिर आऊंगा |