Wednesday, October 2, 2019

2 अक्टूबर

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे 
तुम लाठी लेकर चलते रहना हम बम गोले मरवाएँगे,
भय भूख से घिसट घिसट कर आना तुम चौराहे पर 
केसरिया और हरा दिखा कर नारे तुमसे लगवाएँगे।

लोकतंत्र और लोकाचार दफ़न कर देना क़ब्रों में 
और अपनी अपनी बस्ती को मजहबी मुंडो से भरना
एक रंग का साफ़ा बांधे दूजे रंग से नफ़रत करना, 
मेरी अन्ध्भक्ति में बौद्धिकता जब घुटनो तक आजाएगी
ग़ैर मजहबी मानव तन की लिंचिंग तुमसे करवाएँगे ।

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे 

ख़बरों में लिपटा रंग बिरंगी एक काग़ज़ का चीथड़ा आता है 
उन ख़बरें बूनने वालों से हम अपनी लीला लिखवाएँगे 
चित्रहार और रंगोली का जो बुद्धू बक्सा आया था घर में 
उसी बक्से पर हम तुमको अपना जलवा दिखलाएँगे ।

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे 

इतिहास का जो सबक़ तुम्हारे पुरख़ो ने बतलाया था
उस इतिहास की भारी अर्थी हम तुमसे ही उठवाएँगे
तुम तोता बनकर पढ़ते रहना हम अपना इतिहास पढ़ाएँगे ।

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे 

तुम नौकरी नौकरी गाते रहना हम देशभक्ति समझाएँगे 
तुम हाथ पसारे बैठे रहना हम सब्ज़बाग़ दिखलाएँगे
तुम चीख़ मरना अस्पताल में हम बीमा करवाएँगे 
चुनाव जब फिर आएगा हम पाक से लड़ने जाएँगे।

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे

हिंदू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस में लड़ बनो कसाई
इस नारे से नये भारत का नया नक़्शा बनवाएँगे ।

हम दंगा ख़ूब मचाएँगे फिर गांधी गांधी गाएँगे