Wednesday, November 19, 2014

हिसार (हरियाणा) : देवता और दानवों के बिच संघर्ष जारी !


हिसार: हरियाणा पुलिस अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद संत रामपाल को उसके हिसार के बरवाला आश्रम से गिरफ्तार नहीं कर सकी है। आज पांच दिनों के इंतजार के बाद पुलिस की करवाई दिन के 12 बजे से शुरू हो गई। आप बने रहिये हमारे साथ क्युकी अभी आपकी आँखों के लिए बहुत मसाला बाकी है |

कोई इसे मीडिया की नौटंकी तो कोई बाबाओ की कारगुजारियो के रूप में देख रहा है परन्तु असली भक्त वही है जो रामपाल और पुलिस के इस संघर्ष को देवता और दानवों के संघर्ष के रूप में देखे | हे भक्तो इससे आपके लिजलिजाये विश्वास को नया सहारा मिलेगा |

इस सत्संगी संसार में तीन प्रकार के प्राणी पाए जाते हैं बाबा
, भक्त और दानव बाबा और भक्त दोनों एक दुसरे की बैसाखी है | भक्त के बिना बाबा नहीं बाबा के बिना भक्त नहीं | बाबा या भक्त बनाये नहीं जाते ये तो पैदा होते है | हमारे यहाँ भक्तो की पैदावार ज्यादा है जो आतुर रहता या रहती है किसी ना किसी बाबा के संसर्ग में आने को और दानव वो है जो इन दोनों (बाबा और भक्त ) को शंका की दृष्टी से देखता है |


अजी लानत भेजिए इन मीडिया वालो को जो अपनी TRP रेटिंग के लिए इन बेचारो भक्तो का काम बढ़ाते रहते है | अब इन्हें नई शुरुवात करनी पड़ेगी एक नए बाबा की खोज में जो अबतक तकरीबन तठस्थ हो चुके भक्तो के विश्वास को धुल मल गया | ये मिडिया वाले भी दानवों के फ़ौज की ही एक इकाई हैं डंडे तो इन्हें पड़ने ही चाहिए थे | ये तो देवता का कमाल देखिये जो इनकी ही भस्मासुरो वाली बिरादरी की लाठी से इनकी मजम्त करा गया|

अब लड़ेंगे ये आपस में ही
, एक नया कमीसन बैठेगा इनके आपस के ही टकराव की जाँच को | दानव हथियार का सहारा लेता है और देवता दिमाग का | देवता और दानवों का यही अंतर तो जुदा करता है एक दुसरे से , वरना शक्ल तो सबकी एक जैसी ही होती है | तभी तो दानव रोज पैदा होते है और देवता कभी कभी अवतार लेते हैं | देवताओ की भी अपनी मज़बूरीयां है साहब की इन्ही दानवों की फ़ौज से इन्हें अपना भक्त बनाना पड़ता है जो जरुरत पड़ने पर अपने देवता के लिए हथियार उठा कत्लेआम मचा दे |

किसी पत्रकार ने लिखा की आश्रम की रिपोर्टिंग करते हुए वो आश्रम के अन्दर दानव से भक्त में  रूपांतरित हुए प्राणियों द्वरा वितरित की जा रही चाय भी नहीं पीते थे क्योंकी जिस दूध से चाय बनाई जाती है उस दूध का उपयोग पहले बाबा को नहलाने में किया जाता है, अब इस बात की सचाई वो ही जाने परन्तु इस चायरूपी प्रसाद का अनादर कर कोई देवता के प्रकोप से कैसे बच सकता है |

इनमे से कुछ वैसे भी होंगे जो इस बाबा की वजह से अपने बाबा पर भी एक बार शक किया होगा अब शक किया तो सजा तो मिलेगी वरना भगवान का भय ही ख़तम हो जायगा | भय से ही तो भगवान का विस्तार होता है | भक्तो अपने अपने भय को भी संभाले रखिये क्योंकी भय से भगवान और भक्ति दोनों आते हैं | जिस दिन आपने अपने अंदर के भय को मार दिया समझो भगवान और भक्ति दोनों मर जायेंगे | भगवान मरा तो भक्ति मर जाएगी , भक्ति मरी तो भक्त मर जायेगा , भक्त मरा तो बाबा मर जायेगा और ये पूरा तंत्र चरमरा सकता है इसलिए अपने भय को पालते रहिये |

भक्तो से विनती है की अपने अपने बाबा की तस्वीर और चरणपादुका अपने अपने घरो में संभाल कर रखिये ये आपके कमजोर होते विश्वास को सिंचित तो करेगा ही साथ ही साथ आपकी अधूरी मनोकामनाए भी पूर्ण कर आपको मोक्ष की प्राप्ति कराएगा |


वैसे मोक्ष तो भगवान को भी नहीं मिला है , वरना बार बार अवतरित कैसे होता
अजी इस सवाल को छोड़ दीजिये ये दानवों के सवाल हैं
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