Friday, August 10, 2012

दो महबूबा

मेरी दो महबूबा है यारो दोनो मुझको प्यारी हैं ,
एक से दुनिया रूठी रहती एक दुनिया को प्यारी हैं 

दोनो मुझसे पूछा करती किससे तेरी यारी है 
मैं म्यकस अक्सर यही कहता दोनो से याराना है |

कुछ दिन इसके संग मे रह लू फिर तेरे संग भी आना है
बहुत सोच कर किया फ़ैसला ,जीवन को स्वीकार किया |

उसकी याद भुला कर दिल से जी भर कर इससे प्यार किया
इसने मुझको खूब सताया कभी हंसाया कभी रुलाया |

कभी इज़्ज़त की चादर देती बीच सड़क पर कभी नचाया
थक हार कर जब चूर हुआ बेबस और मजबूर हुआ |
 .
फिर मौत को पास बुलाया यारी जोड़ी गले लगाया
आँखे भर कर उससे बोला तू भी मुझको प्यारी है
प्रियतम अपने संग मे ले चल अबकी तेरी बारी है

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